Book Summaries in Hindi – Collection of Hindi Book Summaries and Audiobooks

The Subtle Art of Not Giving a F

 

The Subtle Art of not Giving a F, असल मतलब क्या है इस नाम का इस बात पर तो हम नहीं जायेंगे क्यूंकि नाम का मतलब कुछ फूहड़ है, पर हाँ, इस किताब में जो भी अच्छी-अच्छी बातें हैं उन्हें हम जरूर सीखेंगे | ऐसा इसलिए क्यूंकि चाणक्य ने कहा है की सोना गन्दी से गन्दी जगह पर ही क्यों न पड़ा हुआ हो, उसकी कीमत हमेशा सोने की ही होती है | इसी तरह किताब का नाम कुछ भी हो, उसमे बताई गयी अच्छी बातें अच्छी ही रहेंगी |

तो चलिए हम किताब में बताई गयी पहली सीख को समझते हैं-

हमें किसी भी चीज के बारे में ज्यादा क्यों नहीं सोचना चाहिए?
यह पुस्तक दूसरी पुस्तकों से कुछ अलग है | जहाँ बाकि किताबें हमें ज्यादा सोचने पर मजबूर करती हैं, वही ये किताब हमसे कहती है कि हमें ज्यादा नहीं सोचना चाहिए | जब हम ये सोचते हैं कि हम में कोई कमी है, तो हम उस कमी के कारण अपने जीवन में कुछ असंतुष्टि महसूस करने लगते हैं | फिर हम उस कमी को दूर करने का उपाय ढूँढने के लिए कोई किताब उठा लेते हैं | जैसे How to Win Friends and Influence People जो कि एक बड़ी ही प्रसिद्ध किताब है, Influence the Psychology of Persuasion एक और भी बहुत ही मानी हुई किताब है | ये कुछ पुस्तके हैं जो हर कोई अपने आप को बेहतर बनाने के लिए पढता है और बेहतर बनता भी है, तो फिर ऐसा करने में समस्या क्या है ?
ऐसा करने में समस्या यही है कि आप अपने आप में चाहे कितने भी सुधार ले आएं, लेकिन कभी परफेक्ट नहीं बन पाएंगे | और जैसे-जैसे आप अपने अंदर सुधार लाते जायेंगे तो आपको पता चलेगा कि अभी तो सुधार लाने की और भी गुंजाईश बाकी है | आप सोचेंगे “अभी तो मैं ऐसा कर के और सुधार ला सकता हूँ, वैसा करके तो और भी अच्छा बन सकता हूँ!” और ऐसा सोचते रहने से आपका अपने जीवन में असंतोष बना ही रहेगा |

दूसरी समस्या ये है कि जब आप अपने जीवन में सुधार लाने का प्रयास कर रहे होते हैं तब असल में आप अपने दिमाग में इस बात से सहमत हो जाते हैं कि आपमें कुछ कमी है | और इस कारण आपके जीवन में और भी नकारात्मकता आ जाती है | इसी बात को हम एक दुसरे नजरिये से भी समझ सकते हैं | आप अपने आप को एक ग्राहक कि तरह देखिये, जब तक आपको ये पता नहीं रहता कि बाजार में कोई प्रोडक्ट है तब तक आप ख़ुशी-ख़ुशी रहते हैं, आपको कुछ नहीं चाहिए होता | उदाहरण के लिए आप उस कार के बारे में सोचिये जो आप लेना चाहते हैं, जब तक आपको ये पता ही नहीं था कि बाजार में ये कार भी हैं, तब तक आप उसके बिना भी खुश थे | पर जैसे ही आपको उस कार के बारे में पता चला, वैसे ही आपका मन उस कार को खरीदने का करने लगा | अब उस कार का आपके पास नहीं होना आपको दुखी करने लगा | कुछ दिनों बाद आपने वह कार ले ली | इसके कुछ महीनो या सालों बाद फिर आपको एक नयी कार के बारे में पता चला और अब आपको लगने लगा कि इस नयी कार को लेकर आप और भी बेहतर कार पा सकते हैं, और फिर से वही चक्र शुरू हो गया | अब आपको फिर एक नयी कार चाहिए, परन्तु अगर ऐसा ही चलता रहा तो हमको तो दुनिया की हर कार खरीदनी पड़ेगी | हर कार लेना न तो फिलहाल संभव है और न ही ऐसा करने का कोई तुक बनता है | तो फिर ऐसी बात पर दुखी होने और बुरा महसूस करने का मतलब ही क्या?

 

जब आपके पास समस्याएं नहीं होती तब आपका दिमाग नई समस्याएं बानाता है
हमारे दिमाग की एक आदत होती है कि जब हमारे पास कोई समस्या न हो तब हमारा दिमाग खुद ही अपनी समस्याओं का अविष्कार कर लेता है | एक अच्छा साथी न होना, एक अच्छा मोबाइल हमारे पास न होना, अच्छे कपडे न होना, ये सब छोटी-मोटी सी, नकली सी समस्याएं हैं जो हमारे दिमाग ने हमारे लिए बना रखी हैं | इसका कारण ये हैं कि हमारे पास कोई असली परेशानियां हैं ही नहीं |

हमें हमारे दिमाग कि इस ख़राब आदत से अवगत रहना चाहिए | और जैसे ही हमें इस बात का एहसास हो कि हमारा दिमाग बस हमको परेशान करने के लिए हमारे सामने समस्याएं खड़ी कर रहा है तो हमको उसी समय उन समस्याओं के बारे में सोचना बंद कर के खुश रहना चाहिए|

ज़रा उन देशों के बारे में सोचिये जो अभी आतंकवादियों या तानाशाहों के नियंत्रण में हैं, हमारी सेना के लोगो के बारे में सोचिये जो अपने परिवार से कई सालों तक दूर रह कर भी सीमा पर दिन-रात तैनात हैं जिससे कि हम सुरक्षित रह सकें | उन लोगों कि समस्याओं से अपनी समस्याओं कि तुलना कर के देखो, तो आपको खुद शर्म आ जाएगी कि आप कितनी छोटी सी बात को ले कर परेशान हो रहे हैं |
छोटी-छोटी समस्याएं तो जीवन में आती रहती हैं, हमे उनको नजरअंदाज करना सीखना पड़ेगा|

 

आपके पास सीमित समय है
यह एक बहुत महत्वपूर्ण तथ्य है जिसे हम अक्सर नजरअंदाज करते रहते हैं | हमें हमेशा ये बात याद रखना चाहिए कि हमारे पास बहुत ही सीमित समय है | एक दिन सबका अंत निश्चित है | अब यह सीमित समय आप या तो हर छोटी बात कि चिंता करते हुए बिताया जा सकता है या फिर जीवन का आनंद लेते हुए बिताया जा सकता है | इसलिए हमेशा उन चीजों पर ध्यान दें जो सच में जरूरी हैं, न कि उन पर जिनका कोई महत्व नहीं है |

फल से प्रेम मत करो, कर्म से प्रेम करो
हम फल के बारे में ज्यादा सोचते हैं क्यूंकि हम उनको सफलता से जोड़ते हैं | हम बहुत संघर्ष करते हैं और बहुत तकलीफें झेलते हैं क्यूंकि हम बुरी तरह चाहते हैं कि हमे अच्छा फल मिल जाये |
पढाई के मामले में ऐसा बहुत होता है | हम वो पढाई करते हैं जिससे ज्यादा पैसे कमाने वाली नौकरी हमें मिले, हम अच्छी कमाई वाली नौकरी के मोह में पड़ जाते हैं और अपने आप को उस कोर्स में झोंक देते हैं जो हमें कभी पसंद ही नहीं था | पर ज्यादातर कर्म कि जगह फल के बारे में सोचना हमें महंगा पड़ जाता है |

बड़े उत्साह के साथ gym (व्यायामशाला) कि सदस्यता लेने वाले लोग जो कुछ दिन बाद gym जाना बंद कर देते हैं, वो एक अच्छा उदाहरण हैं उन लोगों का जो कर्म से ज्यादा फल के बारे में सोचते हैं | वो अपने सुडौल शरीर के सपने तो बहुत सजाते हैं, पर उन सपनो को पाने के लिए जो मेहनत और कष्ट झेलना पड़ता है उस पर ध्यान ही नहीं देते |

फल के बारे में ज्यादा सोचना हमें दुखी भी बनता है क्यूंकि हमें ये लगता है कि अगर ये परिणाम हमको मिल जायेगा तो हम ख़ुशी-ख़ुशी अपना जीवन बिता पाएंगे | पर इंसान का दिमाग कभी इतनी आसानी से खुश नहीं होता | हमारी जरूरते कभी समाप्त नहीं होतीं | इसलिए हमें फल कि जगह कर्म से प्रेम करना चाहिए |

हमें ऐसी समस्याएं ढूंढनी चाहिए जिनका समाधान ढूंढने में हमको मजा आये | हम जब वो करेंगे जो करना वाकई हमको पसंद है, तब हम कर्म को पसंद करना सीखेंगे | जब हमें कोई काम करना पसंद होता है तो हमें उस काम से जुड़ने में मजा आता है | जब हमको किसी काम को करने में मजा आने लगता है तो हम उस काम को बार-बार करते हैं | किसी भी काम को बार बार करने से हम उस काम में निपुण भी हो जाते हैं |

जरा सोचिये कि अगर आपके gym जाने का उद्देश्य एक सुडौल शरीर पाना नहीं, बल्कि ये हो कि आपको व्यायाम पसंद है इसलिए आप gym जाते हैं | जब आपको व्यायाम करना पसंद होगा तो आप खुद रोज व्यायाम करते रहोगे, एक अच्छा शरीर तो फिर अपने आप ही बन जायेगा |

अपने अहम पर लगाम दें 
जब आपका अहम आप पर हावी होने लगता है तब आपका व्यक्तिगत विकास रुक जाता है । अगर आप ऐसा सोचेंगे कि आप एक बहुत महान इंसान हैं जिसको सब कुछ पता है, तो आप दूसरों की बातें सुनना ही बंद कर देंगे । अगर आपको कोई कुछ काम की बात बताएगा भी तो आप बिना सुने ही उसकी बात नकार देंगे । इसलिए आप भले ही कितने भी पढ़े-लिखे इंसान हों , चाहे कितने भी माने हुए इंसान हों, आपको खुद पर घमंड नहीं होना चाहिए । जब आप अपने अहम को क़ाबू में रख कर ये सोचेंगे कि अभी तो आप बहुत ही कम ज्ञान अपने पास रखते हैं, और अभी इस दुनिया में आपके सामने सीखने को बहुत कुछ बाक़ी है तभी आप सही तरक़्क़ी कर पाएँगे । 

अपनी समस्याओं की ज़िम्मेदारी लें। 
ये बात तो सभी जानते हैं की जीवन में कोई समस्या ना आए ऐसा हो ही नहीं सकता । समस्याएँ तो आती रहेंगी और उनको ले कर रोते रहने से आपकी कोई मदद नहीं होने वाली । इसलिए बेहतर ये होगा कि आप अपनी समस्याओं के वश में रहने की जगह आपकी समस्याओं को अपने वश में करने की कोशिश करें । अगर कोई समस्या आपके रास्ते में आ रही है तो उस पर रोने या शिकायत करने की जगह उसके उपाय के बारे में सोचें । ऐसा करने से आप मजबूत तो बनेंगे ही, साथ में समझदार भी बनेंगे । जैसे रोज़ गणित के सवाल हल करने से आपका दिमाग़ हिसाब करने में तेज होता है, उसी तरह जीवन की समस्याओं को लगातार हल करते रहने से रोज़मर्रा की परिस्थितियों के लिए भी आपका दिमाग़ मजबूत और तेज बन जाएगा ।

 

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